krishna vani 408

भगवान!
हर कठीन परिस्थिति मे यही नाम है जो हमे हर लेता है
व्यक्ति जाता है भगवान की पूजा करता है अराधना करता है पाठ पढ़ता है मंदिर में जाता है घंटी बजाता है भगवान को उठाता है
और फिर अरंभ होते है सारे प्रश्न
है भगवान मेरे साथ ऐसा क्यो हो रहा है
क्यो मेरे ही जीवन में इतना दुख है
में केसे इसका सामना करू
मुझे ही क्यो इतना दुख भोगना पड़ रहा है
है भगवान मे क्या करू
मेरी सहायता कीजिए कोई मार्ग दिखाइए 
चलिए मे आपसे प्रश्न करता हू 
मंदिर में जाने का प्रयास करने से पूर्व क्या आपने आपके जीवन में उतना प्रयास किया जितना उस समस्या को दूर करने के लिए अवश्यक था 
दूसरा प्रश्न 
भगवान को उठाने से पूर्व क्या आपने स्वयम को जगाया क्या आपने आलस त्यागा 
तीसरा प्रश्न 
भगवान को पूछने से पूर्व क्या आपने स्वयम से पूछा कि मे क्यो इसमे असफल हो रहा हूँ यदि नहीं तो सर्वप्रथम ये किजिये 
आपको हर प्रश्न का उत्तर मिलेगा हर संकट का निवारण मिलेगा 
कही ओर नहीं स्वयम झाँक के देखिए प्रयास कीजिए स्वयम को जगाइए आप सफल अवश्य होंगे क्योकि वो परमात्मा वो परमेश्वर वो परमभ्रम आपमे भी तो होता है 


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